ऐसा भी होता,तू आज मेरे साथ होता,
अगर मेरे एहेसास छु पाते तेरी रूह की गहराई को...
जमते नहीं मेरे आखो के आंसू,
तेरी सासों की गर्मी अगर मेरे पास होती..
चलते-चलते थक न जाते मेरे कदम,
मंजिल में अगर तुम मेरा इंतजार करती..
तुझे तो अब ख्यालो में ही पाता हो,
हकीकत में ज़िन्दगी कुछ खफा सी रहती है...
मेरी खाव्बो की जमी पर,
अक्सर बरश्ती है तेरी यादो की बूंदे...
इन्हें पलकों में समेटा है मैंने..
आँखों से आंसू बनकर बहती है ये,
खुद को डूबते देखा है इनमे मैंने...

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