वो पल मुझे आज भी याद है जब तुमको देखा था पहली बार.. और वो हर मुलाकात जो तेरी मेहरबानी है मुझपर... हो भी न कैसे याद मुझे वो हर पल जो तुम्हारे साथ बिताये है...!! कुछ ही पल तो जिया हूँ मै दिल से......!
काफी वक़्त गुजर गया न तेरा दीदार हुआ,न तुझसे कोई बात,
लिखना है मुझे खुद को कागज़ में, मगर दर्द-ए-स्याही कुछ कम सी है...
दो एक मुलाकात की खुद को मै पढ़ सको,मै तेरी आँखों से...
मेरे अल्फाजों में कुछ बात हो,जुदा फिर मेरा अंदाज हो....
एहेसास कुछ ऐसे उतरे की आँखे ही नहीं,कागज भी कुछ नम हो...
कुछ ऐसा जो लिख के मै रो दू ,तेरी भी पलके नम हो पढने के बाद,
मै यु ही फ़साने लिखते जाऊ,तुम यु ही मुझे दर्द देती जाना..
अगर मिलती है ख़ुशी तुझे मेरी मायूसी से,
तो खो जाने दो गुमनामी मै कही मेरी पहचान को....

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