Monday, October 31, 2011

ये भी "इश्क" है...





मेरी मोहब्बत को "वो" पागल पन का नाम दे गये...
जाते-जाते मेरी जिंदगी से,"वो" कुछ ऐसा काम कर गए..
आँखों के नाम होने की वजह तो सबके पास ही होती है....
जाते-जाते "वो" मेरी "रूह" को नम कर गए ....
जिन्हें समझने के लिए हम खुद को भूल गए,
"वो" हर कदम पर हमे सजा दे गए...
नहीं है उन्हें मोहब्बत हमसे, इस बात का गम नहीं,
बस एक "कोशिश" की होती हाल-ए-दिल समझने की..
मेरे दिल में है सिर्फ प्यार उनके लिए,
अपने दिल में "वो" सिर्फ नफरत ले गए.....
मेरी मोहब्बत को "वो" पागल पन का नाम दे गये...
जाते-जाते मेरी जिंदगी से,"वो" कुछ ऐसा काम कर गए..
अगर मिल भी जाये कभी रहो में, तो भूल कर भी नज़र "वो" मिलाते नहीं....
एक झलक जिनकी पाने के लिए हम पलके झुकाते नहीं,"वो" हमे नजरो से भी गिरते गए....

Saturday, October 15, 2011

कभी मिले वक़्त दो पल के लिए, तो "रुख" करना दर का हमारे...  महसूस करोगे "खुद" के वहा बसने के एहसास को...यकीन होगा तुम्हे...
                                ""तेरा इंतजार तो अब भी है..तुझसे "प्यार"तो अब भी है"".. 
 दीवारों से की हमने तेरी बाते, सभी तो सोये थे, जागी है मेरी कई राते....घर के हर हिस्से मे तेरी यादें छुपा रक्खी है,खुदा के साथ तेरी तस्वीर लगा रक्खी है.. तेरे यहाँ "" न"" होने का एहसास मुझको नहीं होता..... जो कभी तेरी खुश्बो से महेका था.कोना-कोना मेरे घर का.. तेरी खुश्बो को आज भी बसा रक्खा है...सिर्फ आईने मे ही नहीं तेरा अक्स  हर जर्रे मे दिखेगा.....यकीन होगा तुम्हे....  
                             ""तेरा इंतजार तो अब भी है..तुझसे "प्यार"तो अब भी है""... 
दो पल के लिए ही सही भूल जाना सबकुछ.....खुद को नए सिरे से पाने का एहसास होगा....
मेरी नजरो से जब देखोगे खुद को, तो समझोगे "प्यार" ही खुद है.. यकीन होगा तुम्हे....   
                         ""तेरा इंतजार तो अब भी है..तुझसे "प्यार"तो अब भी है""...

Friday, October 14, 2011

"आस्मां की आगोश मे"

 
 
जमी को छोड़ कुछ पल के लिए, चल आसमान मे उड़े दो पल के लिए......
भूल जाये सब बंदिशे,भूल जाये सब रंजिशे....
तू पंख बन जा मेरे, मै पंख बन जाऊ तेरे लिए..
वो एहसास भी कितना अनोखा होगा,
जिसने दुनिया को उचाई से जिया होगा....
चल फिर उड़ चले इस पल को जीने के लिए,
जमी को छोड़ कुछ पल के लिए...
नीले आकाश से देखेगे, लहराते खेतो को,
गेहरे सागर की गोद,करवटे लेती ज़िन्दगी को...
दूर उड़ते रहे,हवा के रथ पर सवार...दूर कही अपना नया बसेरा बना ले..
बर्फ को चख अपनी प्यास बुझा ले..... 
उड़ चले जमी को छोड़ कुछ पल के लिए,
चल आसमान मे उड़े दो पल के लिए....
मेरी धड़कन को तू महसूस करे, तेरी धड़कन  को मै...
तू मुझमे जिए, मै जियो तेरे लिए....
जमी को छोड़ कुछ पल के लिए, चल आसमान मे उड़े दो पल के लिए......
भूल जाये सब बंदिशे,भूल जाये सब रंजिशे....
तू पंख बन जा मेरे, मै पंख बन जाऊ तेरे लिए..

Thursday, October 13, 2011

"अजनबी" हो गये खुद के लिए...




"तुझको" पाने की तलाश कुछ इस तरह से की........
"तुझको" पाने की तलाश कुछ इस तरह से की......
की खुद को कही दूर पीछे भूल आये हम....
इस तरह से "दीवानगी" है तुझे अपना बनाने की....
कई अपने पीछे भूल आये हम....
न रहो पर ध्यान है, न रहगुजर पर...... न रहो पर ध्यान है, न रहगुजर पर....
"तेरी" तलाश मे भटकते दर-बदर...
एक पल तेरे "दीदार" को, अपने हर पल को थामा है....
एक पल तेरे "दीदार" को, अपने हर पल को थामा है....
पलक झपकने के दर्मिया तू गुजर न जाये कही राहो से....
इस डर से हमने झपकती पलकों को थामा है....
आईने मे तेरी सूरत दिखती है... तेरी धड़कन मे  "मुझे" मेरी ज़िन्दगी दिखती है...
बहुत कुछ है मेरे पास, बहुत कुछ है मेरे पास,पर सब कुछ क्यों कम सा लगता है...
मेरा "वो" सब कुछ क्यों "तुम" सा लगता है....मेरा "वो" सब कुछ क्यों "तुम" सा लगता है...
जागती रातो के साथ, सोती सुबह के साथ, होश मे हो या फिर मदहोशी के साथ..
तेरा ख्याल दिल से जाता ही नहीं... 

Tuesday, October 11, 2011

फिर क्यों तुम मेरी नहीं हो

तुम मेरी जिंदगी हो....तुम मेरे हर पल मे हो .....
फिर क्यों तुम मेरी नहीं हो......तुम मेरे दिन मे हो,मेरी रात मे हो...
फिर क्यों तुम मेरी नहीं हो.....
मेरे खयालो मे तुम हो , मेरे ख्वाबो तुम हो ....
मेरी हर बात तुमसे है,जुड़े हर जज्बात तुमसे है....
फिर क्यों तुम मेरी नहीं हो.....
सुना है की "रब" सबकी सुनता है...दिल से मांगी हर दुआ कबूल करता है.....
मंदिर,मज्जिद,गुरूद्वारे..... सिर्फ तुझको पाने के सजदे किये है....
फिर क्यों तुम मेरी नहीं हो.....
 कहते है सभी की ""इश्क"" एक इबादत है... कहते है सभी की ""इश्क"" एक इबादत है...
सच है अगर ये तो...पूजा ही की हमने तेरी....तुझको अपना "'खुदा" मानकर....
फिर क्यों तुम मेरी नहीं हो.....
 तेरे नाम से धडकनों का शोर बढ जाता है...तेरे ख्यालो से हर पल गुजर जाता है..... तुम नहीं मेरे आस-पास... फिर क्यों ये नज़रे,तुझको तलाशती है पल-पल.....ये क्या है जो तेरे "एहेसास" को मुझसे जुदा नहीं करता.... अगर है ये मोह्हबत... फिर क्यों तुम मेरी नहीं हो.....फिर क्यों तुम मेरी नहीं हो.....

Wednesday, October 5, 2011

सब कुछ तो ""माँ "" है.....

जब पहचान न थी हमारी तब से जिसने जाना है हमे वो "माँ" है..... 
हमारी हर साँस को जिसने हर पल जिया है वो "माँ" है..... 
दुनिया की तकलीफ से "महफूज" रख जिसने खुद मे पाला है हमे वो "माँ" है..... 
कभी धुप से, कभी बारिश से..कभी सर्द जाड़ो की रातों से....
हर पल अपने आँचल मे छुपाया है वो "माँ" है.....  
आज भी हमे समझना सबके लिए आसान नहीं...
बिन बोले जिसने सबकुछ समझा वो "माँ" है..... 
कभी दोस्त, कभी बहन, कभी साथी... नारी के रूप है कई..
पर सबसे प्यारी वो "माँ" है..... 
बिन मांगे जो सबकुछ दे...बदले मे कुछ न ले....
जिसे हर दर्द का एहेसास ... जो हर पीड़ा को समझे ...
आपकी हर "दुआ" मे जिसकी "रजा" हो...
जो हर पल आपके लिए "दुआ" करे  वो "माँ" है..... 
हर ख़ुशी कम सी है....हर रिश्ता कम सा है.....
सबसे बढकर जो है  वो "माँ" है..... सब कुछ तो ""माँ "" है.....