Sunday, November 20, 2011

""मुस्किल है तुझसे नफरत


जमाने का तो पता नहीं हमें...पर मेरी मोहब्बत में कोई शर्त न थी...
तुम होगे मेरे या नहीं ये रब जाने...दिल में मेरे सिर्फ प्यार रहेगा... 
नफरत की कोई जगह नहीं....प्यार मुझे सिर्फ तुझसे नहीं, तेरी हर बातो से है...
तेरी आँखों से,तेरे मिलने के वादों से है...तेरे इंतजार,तेरे आने के खयालो से है....
तुम चाहो तो भूल जाना मुझे... तुम्हारे लिए आसान ही होगा...
पर मुझे तो तेरी इस अदा से भी प्यार ही होगा...

Saturday, November 19, 2011

""कुछ नहीं सब कुछ तुम हो""

 
एहेसास तो कई है यहाँ महसूस करने के लिए....
पर दर्द से नाता टूटता ही नहीं....
ख़ुशी की तलाश में निकले घर से हम जब भी....
रहो में हमेशा घेरा अंधेरो ने मुझे....
अब क्या करे,कैसे समझाए इस दिल को....
कुछ रिश्तो को ये भूलता ही नहीं....
कोई है जो निभाने की वजह देता ही नहीं..
कुछ वादे नहीं थे हमारे दरमियाँ....
सो वो मुशकुरा कर चल दिए ज़िन्दगी से मेरी...
जिनको चाह है हमने हर पल खुद से बढकर...
पर वो की एक मुलाकात देते नहीं.....

Thursday, November 17, 2011

""एक तम्मना""


मेरे और खुद के बीच,मेरी गलतियों की चादर है....
दुआ पहुची नहीं उन तक,तो रज़ा कबूल कैसे होती...
लाख चाहा की सुलझ जाये मुश्किलें मेरी....
पर ज़िन्दगी है की और उलझती गयी...
अब तो सुलझाने का वक़्त नहीं मिलता..
की उलझनों को गिनने में शाम गुजरती है मेरी...
अब भी सजदा करती है आँखे मेरी....
पर अब कोई अल्फाज नहीं इनमे....
मांग कर तो देखा खुशियों का सागर..
मगर मिल न सकी एक अदत बूँद...
चलो देखे जरा बिन मांगे नसीबा क्या दे जाता है.....

Saturday, November 12, 2011

"ख़ामोशी में तुम"

आज न जाने क्यों दिल खमोश है..एहेसास को आज कोई अल्फाज़ नहीं है....
बाते तो है मगर बातो वो बात नहीं है...सबकुछ होकर भी "कुछ" है "जो" साथ नहीं है....
"गुफ्तगू" होती है तेरी खुद से,"गुफ्तगू" होती है तेरी खुद से तू नहीं है जब से....
खुद का  कुछ हिस्सा तू जी रही है  मुझमे......मै रुक भी जाऊ अगर थक के.....
एक तू है मुझमे थमता नहीं..एक तू है मुझमे थमता नहीं..
कुछ ही पल है हमारे जो कभी साथ बांटे थे...कुछ ही पल है हमारे जो कभी साथ बांटे थे...
उनको हर रोज़,हर पल जीता हूँ.....तेरे एहेसास को खुद में जीता हूँ.....तेरे एहेसास को खुद में जीता हूँ.....

Wednesday, November 2, 2011

.""लौट आओ""

 

वो आदत बन गए मेरी....जिनके खयालो मे भी हम दूर तक नहीं....वो दिल से जाते ही नहीं...जिनको हम कभी याद आते ही नहीं...देख कर राहो में अजनबी से बन जाते है...आँखे करती है कई  सवाल "उनसे " पर वो है की नज़र मिलते ही नहीं.. पर वो है की नज़र मिलते ही नहीं.. हम न करते "इजहार-ए-मोहब्बत",अगर वो इतना तड़पाते नहीं.... मालूम होता इस नादाँ दिल को... की दूर तो तब भी वो चले जायेंगे,भूल कर भी उन्हें कभी पास बुलाते नहीं.... भूल कर भी उन्हें कभी पास बुलाते नहीं..... हर वक़्त वो मेरे साथ होकर भी,कुछ दूर सा लगता है...वो मेरी ज़िन्दगी का सिर्फ हिस्सा नहीं..  मेरी ज़िन्दगी सा लगता है....