Saturday, June 9, 2012

काश सपने सच होते

अक्सर खाव्बो मे देखा है तुमको, रात की आगोश में,जब कोई दूसरा हम दोनों के दरमियाँ नहीं होता..!!
रात की ख़ामोशी को समेटे तेरी आँखे,चाँद की चमक जैसे सिर्फ तेरे चहरे पर खिली सी...
रात को तुम अपना दोस्त बनाकर,जब सबसे छुपकर मिलती हो मुझसे,तो ऐसा लगता है की वजुद मिल गया मेरा..!!
दिन-भर दुनिया की भीड़ मे बिना मंजिल के,एक लाश की तरह भटकते जिस्म को उसकी रूह मिल गई हो जैसे..
तेरे साथ कुछ लम्हे जो बाटें,वही सच सा लगता है मुझे मेरा.. हालाकिं मालूम है सपना ही है आँख खुलते ही टूट जायेंगा.!! दुनियाँ की भीड़ मे, मै फिर कही गुमनाम सा खो जाऊंगा...!!
कभी-कभी सोचता हूँ की काश ये सुबह न हो,काश ये आँखे न खुलती,तुझको समेट लेता अपनी बंद पलकों मे कही,महफूज रखता हर उस पल को जो तेरे साथ बिताएं...!!
मालूम है मुझे ये सब एक ख्वाब है,हकीकत मे तू मुझसे जुदा है,पर जो भी हो तेरे साथ होने का भ्रम मुझे मेरे अधूरे  सच से जादा प्यारा है...
कभी तुम मिलो मुझसे मेरी खवाबो की दुनिया से अलग,तो बता दूं की तुम मेरे लिए क्या हो??

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