Saturday, December 31, 2011

"मोहब्बत नहीं खुमार है मेरा"


शहनाई के शोर में वो मशगुल थे इस कदर,
मेरी सिसकिया उन्हें कहाँ सुनाई देती..
वो जो हर बार हमें नजरो से गिराते गए,
हमारी मायूसी भला कैसे दिखाई देती...

वो जो कहते है दिल का टूटना उन्हें नागवार है,
हर दिल को बचाते-बचाते,इस दिल को वो तोड़ते गए...

कहते है हमसे "मोहब्बत नहीं खुमार है मेरा"
जरा दिल को टटोल कर देखो अपने...
जब भी तलाशा है खुद को हमने,
खुद में उनके निशाँ ही पाते गए...

गर है खुमार ये उनके लिए,तो खुमार ही सही,
इस नशे के साथ ही जीना है हमें,
मुझे न होश में आने देना..
इस नशे में ही हम अक्सर खुद को सँभालते गए....

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