सितारों का करवा असमान मे था, चाँद हर पल पिघल रहा था.......
बूँद-बूँद पिघलते चाँद को देखकर... कुछ हमे याद आ रहा था..
यु ही अस्मा मे एक नज़र देखता रहा...
सितारों को चुन तेरी तश्वीर बनाता रहा...
अकेले हम भी थे.. अकेला चाँद भी था....
कुछ हम उसे, कुछ वो हमे सुनाता रहा......
सितारों को चुन तेरी तश्वीर बनाता रहा...
अकेले हम भी थे.. अकेला चाँद भी था....
कुछ हम उसे, कुछ वो हमे सुनाता रहा......
जब बनी तश्वीर तेरी, तो चाँद कुछ रूठ सा गया,
कहने लगा पागल तू जमीं में चाँद कैसे पा गया..
मुश्कुरा कर हमने चाँद से कहा,
तेरा दीदार तो मुझे हर रात होता है,
पर ये चाँद मुझसे कही खो गया....






