Sunday, December 4, 2011

I M TRYING BUT CAN'T HATE U....



सुबह नहीं हुई हमारी न जाने कब से,ये रात कुछ थम सी गयी है, 
पलके तरश्ती है झुख जाने को पर हमे नींद आती ही नही है..
कुछ दर्द पल रहा है दिल मे मेरे,वो एहेसास ज़रूर तेरे ही है,
बूँद-बूँद कर,तूने तोड़े मेरे हर खवाब...तरसाया तुने इतना हमे..
की प्यास अब हमें आती ही नहीं है....
हर अजनबी से डर लगता है मुझे,कही वो ठग न ले,
अपनों की महफ़िल में भी हम जाते नहीं....
हर एक की बातो में क्यों रंजिश सी दिखती है,
खुद से भी नजर हम मिलाते ही नहीं....
तुने जो दिए खजाने आसू के,वो थमते नहीं,
हसी तो आती है हमें, पर दो पल के लिए भी मुश्कुराते नहीं.....
करता हो कोशिश की तुझसे नफरत कर लू...
पर मेरी मोहब्बत मेरा साथ देती ही नहीं....

No comments:

Post a Comment