Thursday, January 19, 2012

तुम मुझे हद तक जलाती रहना,मै रोम-रोम जल जाऊंगा...

ये क्या है जो न पास आता है, न ही भुलाया जाता है..!! एक डोर तेरे-मेरे बीच है,जिसके एक सिरे में मै हूँ बंधा सा...दूजे सिरे में तुम बहती हवा सी....
मै उड़ के तेरे पास आ नहीं सकता, चाहकर भी ये डोर खीँच नहीं सकता.... 
I DON'T CARE HOW MUCH U HURT ME, I VILL STILL LUV U....

 

तुम मुझे हद तक जलाती रहना,मै रोम-रोम जल जाऊंगा...
यहाँ मेरी पहचान ही नहीं,मेरी यादें भी न रहेगी....
बस इतना याद रखना,जब एहसास तुझे होगा,
की मोहब्बत तो तुझे भी हो गयी है मुझसे...
जब चुनना चाहोगे गुजरे पल से कुछ यादो को.....
वाहा मेरी राख़ नहीं,यहाँ फिजा से मेरी खुशबू भी नदारत होंगी...

फिर न तलाश करना मुझे दीवानी बनकर,
तुमने अपने कल मे मारा है मुझे...
फिर न लौट पाउँगा तेरे आज में.....
न ढूँढना मेरे साये को कही,
न चल सकूँगा तेरी परछाई बनकर...

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