Sunday, September 25, 2011

""SIRF TUM""


पहली नज़र मे जो अपना सा लगा वो "तुम हो",, 
मेरी आँखों ने जिसे हर पल तलाशा "तुम हो"....
सुबह से शाम,शाम से रात जिस ख्याल मे हो जाती है उस ख्याल मे "तुम हो".......
अब जब भी सजदा करते है "खुदा" के सामने, हर "'दुआ"' मे शामिल "तुम हो".....
ज़िन्दगी को हम जी रहे थे यु ही, पर अब से मेरी ज़िन्दगी "तुम हो"..... 
यकीन न हो आपको हमपर,पर ये शहर अब खुबसूरत सा लगता है.....
यहाँ जैसे ज़र्रे-ज़र्रे मे शामिल "तुम हो".....
बहुत कुछ खोया है हमने अब तक....
पर जो भी मिल पाया मुझे वो सबकुछ "तुम हो".......
हा मै शयर तो नहीं... पर जो लिख पता हूँ उसकी वजह "तुम हो"....
सिर्फ तुम हो, तुम हो,और सिर्फ तुम ही हो ...

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