Thursday, September 22, 2011

TU AAJ BHI KAHI AAS-PAS HAI.....

मैं आईने मे देखकर,खुद से ये बाते करता हूँ....
तेरी जुल्फों के साए मे,मेरी ज़िंदगी गुज़र जाये....                  
जब हो हाथों में हाथ तुम्हारा,वो पल वही थम जाये.....

मैं आईने मे देखकर खुद से ये बाते करता हूँ..
काएनात की खूबसूरती तेरे सामने कुछ नहीं,
चाँद की रौशनी तेरे सामने कुछ नहीं...
तुझे देखते -देखते सारी उम्र गुज़र जाये.....
जब मुशकुराती हो तुम,लबू पर मोती बिखर जाते है,
जैसे आसमान मे बिखरे हो सितारे कई....

मैं आईने मे देखकर खुद से ये बाते करता हूँ,
हर पल तुम बिन एक सजा सी लगती है,
साँसे मेरी कुछ जुदा-जुदा सी लगती है....
क्यों इतनी मोहब्बत है तुमसे,हर महफ़िल तनहा से हो जाते है,
जब से करीब हुए हो दिल के आप न चाहते हुए हम सबसे दूर हो जाते है...
हर पल आपकी याद है,हर पल आपका ख्याल है,  
आपसे  हमारे दिन,आपसे ही रात है...

मैं आईने मे देखकर,खुद से ये बाते करता हूँ,
तेरे साथ जो कुछ लमहे बिताये है,उनमे हमने जिंदगी छिपा ली,
दुआऊ का दिया बुझ न पाए कभी,ख़ुदा के सामने रूह तक जला ली...
हो तुम मेरे मुकद्दर मे,मै नहीं जानता,पर तुझको अपनी तकदीर बना ली,
खतम न होंगी खुद से तेरी बाते, हर धड़कन के साथ तेरी याद है,
इस याद को हमने अपनी आदत बना ली..

मैं आईने मे देखकर खुद से ये बाते  करता हूँ,
तेरी जुल्फों के साए मे,मेरी ज़िंदगी गुज़र जाये,
जब हो हाथों में हाथ तुम्हारा,वो पल वही थम जाये...
मैं आईने मे देखकर खुद से ये बाते  करता हूँ..

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