Thursday, September 22, 2011

""SAFAR""......

 
बरसो  से  चलते -चलते  थक  गयी  मेरी  आँखे , खाव्बे  मंज़िल   को  पाने  के  लिए ,
फिर  चल  पड़ी  मेरी  आँखे ……..खुली  आँखों  से  देखे  है  कई  सपने ,
खुली  आँखों  से  सूये है  कई  राते ……कभी  कुछ  पाकर ,कभी  सबकुछ खोकर,
अक्सर  नम रही है  मेरी  आँखे ….. ज़िंदगी  के  सफ़र  मे  चलते -चलते  रहो  मे  कई  मिले ,
फिर  भी  किसी  अपने  को  तलाशती  मेरी  आँखे ……बरसो  से  चलते -चलते  थक  गई  मेरी  आँखे ……….

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