कभी मिले वक़्त दो पल के लिए, तो "रुख" करना दर का हमारे... महसूस करोगे "खुद" के वहा बसने के एहसास को...यकीन होगा तुम्हे...
""तेरा इंतजार तो अब भी है..तुझसे "प्यार"तो अब भी है""..
दीवारों से की हमने तेरी बाते, सभी तो सोये थे, जागी है मेरी कई राते....घर के हर हिस्से मे तेरी यादें छुपा रक्खी है,खुदा के साथ तेरी तस्वीर लगा रक्खी है.. तेरे यहाँ "" न"" होने का एहसास मुझको नहीं होता..... जो कभी तेरी खुश्बो से महेका था.कोना-कोना मेरे घर का.. तेरी खुश्बो को आज भी बसा रक्खा है...सिर्फ आईने मे ही नहीं तेरा अक्स हर जर्रे मे दिखेगा.....यकीन होगा तुम्हे....
""तेरा इंतजार तो अब भी है..तुझसे "प्यार"तो अब भी है""...
दो पल के लिए ही सही भूल जाना सबकुछ.....खुद को नए सिरे से पाने का एहसास होगा....
मेरी नजरो से जब देखोगे खुद को, तो समझोगे "प्यार" ही खुद है.. यकीन होगा तुम्हे....
""तेरा इंतजार तो अब भी है..तुझसे "प्यार"तो अब भी है""... 
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