Friday, October 14, 2011

"आस्मां की आगोश मे"

 
 
जमी को छोड़ कुछ पल के लिए, चल आसमान मे उड़े दो पल के लिए......
भूल जाये सब बंदिशे,भूल जाये सब रंजिशे....
तू पंख बन जा मेरे, मै पंख बन जाऊ तेरे लिए..
वो एहसास भी कितना अनोखा होगा,
जिसने दुनिया को उचाई से जिया होगा....
चल फिर उड़ चले इस पल को जीने के लिए,
जमी को छोड़ कुछ पल के लिए...
नीले आकाश से देखेगे, लहराते खेतो को,
गेहरे सागर की गोद,करवटे लेती ज़िन्दगी को...
दूर उड़ते रहे,हवा के रथ पर सवार...दूर कही अपना नया बसेरा बना ले..
बर्फ को चख अपनी प्यास बुझा ले..... 
उड़ चले जमी को छोड़ कुछ पल के लिए,
चल आसमान मे उड़े दो पल के लिए....
मेरी धड़कन को तू महसूस करे, तेरी धड़कन  को मै...
तू मुझमे जिए, मै जियो तेरे लिए....
जमी को छोड़ कुछ पल के लिए, चल आसमान मे उड़े दो पल के लिए......
भूल जाये सब बंदिशे,भूल जाये सब रंजिशे....
तू पंख बन जा मेरे, मै पंख बन जाऊ तेरे लिए..

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