Thursday, October 13, 2011

"अजनबी" हो गये खुद के लिए...




"तुझको" पाने की तलाश कुछ इस तरह से की........
"तुझको" पाने की तलाश कुछ इस तरह से की......
की खुद को कही दूर पीछे भूल आये हम....
इस तरह से "दीवानगी" है तुझे अपना बनाने की....
कई अपने पीछे भूल आये हम....
न रहो पर ध्यान है, न रहगुजर पर...... न रहो पर ध्यान है, न रहगुजर पर....
"तेरी" तलाश मे भटकते दर-बदर...
एक पल तेरे "दीदार" को, अपने हर पल को थामा है....
एक पल तेरे "दीदार" को, अपने हर पल को थामा है....
पलक झपकने के दर्मिया तू गुजर न जाये कही राहो से....
इस डर से हमने झपकती पलकों को थामा है....
आईने मे तेरी सूरत दिखती है... तेरी धड़कन मे  "मुझे" मेरी ज़िन्दगी दिखती है...
बहुत कुछ है मेरे पास, बहुत कुछ है मेरे पास,पर सब कुछ क्यों कम सा लगता है...
मेरा "वो" सब कुछ क्यों "तुम" सा लगता है....मेरा "वो" सब कुछ क्यों "तुम" सा लगता है...
जागती रातो के साथ, सोती सुबह के साथ, होश मे हो या फिर मदहोशी के साथ..
तेरा ख्याल दिल से जाता ही नहीं... 

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