तू मुझमे पल रहा है कुछ इस तरह,
की मै मुझमे ही कम होता गया...
तुझको को पाने की तलाश कुछ यु होई,
की मै मुझमे ही कही खुद को खोता गया.....
कसूर ये मेरा नहीं,ये दोष मुझे मत दो,
साजिस है इस दिल की,
जो मुझमे होकर भी तेरा होता गया....
बहुत समझाया मैंने इस दिल को,
है ये सब तेरी आँखों का जादू..
संभल जा,तू रुक जा,दिल तू यु नादाँ मत बन,
न माना ये पागल मेरी कुछ भी,
तेरी सुध-बुध मे तेरा होता गया....
अब धडकता है ये सिर्फ तेरे लिए,
मेरे इसमें कुछ असर न रहा...
मेरा होकर भी ये अब मेरा नहीं रहा....
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