वो आदत बन गए मेरी....जिनके खयालो मे भी हम दूर तक नहीं....वो दिल से जाते ही नहीं...जिनको हम कभी याद आते ही नहीं...देख कर राहो में अजनबी से बन जाते है...आँखे करती है कई सवाल "उनसे " पर वो है की नज़र मिलते ही नहीं.. पर वो है की नज़र मिलते ही नहीं.. हम न करते "इजहार-ए-मोहब्बत",अगर वो इतना तड़पाते नहीं.... मालूम होता इस नादाँ दिल को... की दूर तो तब भी वो चले जायेंगे,भूल कर भी उन्हें कभी पास बुलाते नहीं.... भूल कर भी उन्हें कभी पास बुलाते नहीं..... हर वक़्त वो मेरे साथ होकर भी,कुछ दूर सा लगता है...वो मेरी ज़िन्दगी का सिर्फ हिस्सा नहीं.. मेरी ज़िन्दगी सा लगता है....

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